थोड़ा सा अटपटा मै
थोड़ी अटपटी सी मेरी ख़्वाहिशें
खुली मुट्ठी ,खुला दिल
खुले जज़्बातों का उमड़ता शैलाब
बेबाक़ , बेतहाशा
बेजुबां , बिनबोलता
और इस जंजाल की ये साज़िशें
थोड़ा सा अटपटा मै
थोड़ी अटपटी सी मेरी ख़्वाहिशें...
बेधड़क और कड़क सी
गुर्राती और कड़कड़ाती आवाज
सख़्त और बेअदब जुबाँ
टूटे दिल और ढहे उत्साह की ये
उलटे शब्दों वाली नुमाइशें
थोड़ा सा अटपटा मै
थोड़ी अटपटी सी मेरी ख़्वाहिशें...
रिस्तो की कद्र जान तक
इनकी हदें हैं मान तक
सख्त लहज़ा , नर्म दिल
दर्द से ढुलकते आँसुओं की रंजिशें
थोड़ा अटपटा सा मै
थोड़ी अटपटी सी मेरी ख़्वाहिशें....
अविनाश
WONDERFULL POEM........
ReplyDeleteWell composed.. keep it up..
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ReplyDeleteGood going keep it up..
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